
ईवी बैटरी का सम्पूर्ण ज्ञानकोश: वह सब कुछ जो आपको जानना आवश्यक है
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) दुनिया भर में यातायात के तरीके में क्रांति ला रहे हैं। और हर इलेक्ट्रिक कार का दिल और दिमाग उसकी बैटरी है। यह न सिर्फ़ वाहन को शक्ति प्रदान करती है, बल्कि इसकी लागत, प्रदर्शन, रेंज और दीर्घायु भी तय करती है। एक जानकार ईवी मालिक या उत्साही बनने के लिए ईवी बैटरी की बारीकियों को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह व्यापक मार्गदर्शिका (Pillar Post) आपको बैटरी की बुनियादी रसायन विज्ञान से लेकर, उसके तकनीकी विवरण, चार्जिंग के तरीके, बैटरी के क्षरण (Degradation) को रोकने के उपाय, वारंटी, और भविष्य की तकनीकों तक – सब कुछ विस्तार से समझाएगी।
ईवी बैटरी की मूलभूत संरचना और रसायन विज्ञान (What Powers Your EV? The Basics of Battery Chemistry)
आज के अधिकांश आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन लिथियम-आयन (Li-ion) बैटरी पर निर्भर करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनमें ऊर्जा भंडारण की अद्भुत क्षमता है। लेकिन “लिथियम-आयन” एक व्यापक शब्द है; इसमें कई अलग-अलग रसायन शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक के अपने फायदे और trade-offs हैं।
एक बैटरी सेल मुख्य रूप से तीन भागों से बना होता है: एक एनोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड), एक कैथोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड), और एक इलेक्ट्रोलाइट। जब बैटरी चार्ज हो रही होती है, तो लिथियम आयन एनोड से कैथोड की ओर जाते हैं। डिस्चार्ज (गाड़ी चलाने) के दौरान, ये आयन वापस एनोड की ओर बहते हैं, जिससे विद्युत धारा पैदा होती है।

मुख्य कैथोड रसायन विज्ञान जिनसे आपका सामना होगा:
- NMC (निकल, मैंगनीज, कोबाल्ट): यह सबसे आम रसायनों में से एक है। NMC ऊर्जा घनत्व (Energy Density) और दीर्घायु (Longevity) के बीच एक उत्कृष्ट संतुलन प्रदान करता है। इसका मतलब है अधिक रेंज और लंबे जीवनकाल का अच्छा मेल। हुंडई, किया, BMW, और फोर्ड जैसे अधिकांश प्रमुख OEM इसका उपयोग करते हैं।
- LFP (लिथियम आयरन फॉस्फेट): यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। LFP बैटरी में कोबाल्ट जैसे महंगे और दुर्लभ तत्वों का उपयोग नहीं होता, जिससे वे सस्ती होती हैं। इनमें उत्कृष्ट thermal stability होती है, जिससे आग लगने का खतरा कम होता है, और इनका life cycle (चार्ज साइकिल की संख्या) NMC से कहीं अधिक होता है। नुकसान यह है कि उनका ऊर्जा घनत्व NMC की तुलना में थोड़ा कम होता है, जिसका अर्थ है समान रेंज के लिए थोड़ा बड़ा और भारी बैटरी पैक। टेस्ला (स्टैंडर्ड रेंज मॉडल), टाटा नेक्सन, और MG जैसी कंपनियाँ अब LFP बैटरी का उपयोग कर रही हैं।
महत्वपूर्ण तकनीकी विशिष्टताएँ: kWh, Voltage, और Amp-Hour को समझें (Key EV Battery Specifications: kWh, Voltage, and Amp Hours Explained)
ईवी की ब्रोशर या समीक्षा पढ़ते समय, आपको कुछ तकनीकी शब्दों का सामना अवश्य होगा। आइए इन्हें सरल भाषा में समझते हैं।
- किलोवाट-आवर (kWh): यह बैटरी पैक की क्षमता (Capacity) का माप है। इसे आप अपनी कार के “ईंधन टैंक के आकार” के रूप में समझ सकते हैं। जितनी अधिक kWh की संख्या होगी, उतनी ही अधिक विद्युत ऊर्जा बैटरी में संग्रहित की जा सकती है, और इस प्रकार, वाहन की रेंज उतनी ही अधिक होगी। उदाहरण के लिए, टाटा टिगोर EV के पास 26 kWh का बैटरी पैक है, जबकि हुंडई आयनिक 5 के पास 72.6 kWh का एक बड़ा पैक है, जो उसे लंबी दूरी तय करने में सक्षम बनाता है।
- वोल्टेज (V): इसे विद्युत परिपथ में “दबाव” या “धक्का” के रूप में सोचें। उच्च वोल्टेज प्रणाली (जैसे टेस्ला की 400V या पोर्शे टेकन की 800V आर्किटेक्चर) कम ऊर्जा हानि के साथ तेज चार्जिंग और अधिक शक्तिशाली मोटरों की अनुमति देती हैं। 800V आर्किटेक्चर उन ultra-fast charger पर पूरी गति से चार्ज कर सकता है।
- एम्पीयर-आवर (Ah): यह एक व्यक्तिगत बैटरी सेल की चार्ज क्षमता का माप है। आमतौर पर पूरे पैक के लिए kWh का उपयोग किया जाता है, लेकिन Ah सेल स्तर पर एक महत्वपूर्ण माप है। ऊर्जा (Wh) प्राप्त करने के लिए, आप Voltage को Amp-hour से गुणा करते हैं (V x Ah = Wh)।

बैटरी प्रबंधन प्रणाली (BMS): ईवी बैटरी का दिमाग (Battery Management Systems (BMS): The Brain of the Operation)
हजारों छोटी बैटरी सेलों का एक संग्रह अपने आप कुछ नहीं कर सकता। उन्हें एक बुद्धिमान प्रणाली की आवश्यकता होती है, और यही बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) है। BMS बैटरी पैक का “दिमाग” है और इसके कार्य अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण हैं:
- निरंतर निगरानी (Monitoring): BMS हर पल हर सेल और मॉड्यूल के वोल्टेज, तापमान, और करंट पर नजर रखता है।
- संतुलन (Balancing): कोई भी दो सेल एक जैसे नहीं होते। BMS यह सुनिश्चित करता है कि सभी सेल एक समान रूप से चार्ज और डिस्चार्ज हों। यह ओवरचार्जिंग या अत्यधिक डिस्चार्ज होने से बचाता है, जिससे बैटरी का जीवन बढ़ता है।
- सुरक्षा (Protection): BMS बैटरी और वाहन की सुरक्षा के लिए एक अंतिम सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। यदि शॉर्ट सर्किट, ओवरहीटिंग, या कोई अन्य खतरनाक स्थिति उत्पन्न होती है, तो BMS तुरंत बैटरी को डिस्कनेक्ट कर सकता है।
- स्टेट ऑफ़ चार्ज (SOC) का अनुमान: यह आपके डैशबोर्ड पर दिखने वाली “शेष रेंज” या बैटरी प्रतिशत की गणना करता है, जो एक जटिल गणितीय एल्गोरिदम पर आधारित है।

थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम (TMS): बैटरी को ठंडा और सुरक्षित रखना ( How to keep your battery cool and secure)
लिथियम-आयन बैटरी तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं। न तो बहुत अधिक गर्मी और न ही बहुत अधिक ठंड उनके लिए अच्छी है। थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) बैटरी को उसके आदर्श तापमान सीमा (आमतौर पर 20°C से 30°C) में रखने का काम करता है।
- तरल शीतलन (Liquid Cooling): अधिकांश आधुनिक, लंबी दूरी वाली ईवी में उन्नत तरल शीतलन प्रणाली होती है। एक Coolant द्रव बैटरी पैक के माध्यम से चलता है और अतिरिक्त गर्मी को एक रेडिएटर में स्थानांतरित कर देता है, जैसे इंजन की गर्मी को ठंडा करता है।
- वायु शीतलन (Air Cooling): कुछ बजट-उन्मुख ईवी (जैसे पुरानी निसान लीफ) में बैटरी को ठंडा रखने के लिए केवल हवा का उपयोग किया जाता है। यह सिस्टम सरल और सस्ता है लेकिन तीव्र DC फास्ट चार्जिंग या अत्यधिक गर्म मौसम में उतना प्रभावी नहीं हो सकता है।
- गर्म करना (Heating): सर्दियों में, ठंडे तापमान में बैटरी की दक्षता कम हो जाती है और चार्जिंग धीमी हो जाती है। TMS बैटरी को उसके इष्टतम तापमान पर पहुँचाने के लिए इसे गर्म भी कर सकता है, खासकर तेज चार्जिंग सत्र से पहले।

चार्जिंग का विज्ञान: AC, DC और आपकी बैटरी पर प्रभाव ( Science of Charging: AC,DC and its affect on your battery)
आपकी चार्जिंग की आदतें सीधे आपकी बैटरी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। आइए चार्जिंग के प्रकारों को समझें।
- AC चार्जिंग (लेवल 1/लेवल 2 – घर/दफ्तर पर): यह ईवी चार्जिंग का सबसे सामान्य और दैनिक रूप है। जब आप घर के सॉकेट या घर पर लगे विशेष ईवी चार्जर से चार्ज करते हैं, तो आप AC (अल्टरनेटिंग करंट) की आपूर्ति कर रहे होते हैं। कार का ऑन-बोर्ड चार्जर इस AC करंट को DC में बदलता है और बैटरी में भेजता है। यह प्रक्रिया “धीमी और स्थिर” है और बैटरी के लिए अत्यंत कोमल है। यह दैनिक उपयोग के लिए आदर्श है।
- DC फास्ट चार्जिंग (लेवल 3 – सार्वजनिक स्टेशन): DC फास्ट चार्जर, जैसे टेस्ला सुपरचार्जर या तेज चार्जर, सीधे बैटरी को DC करंट की आपूर्ति करते हैं। चूंकि करंट का रूपांतरण चार्जर के अंदर होता है, यह बहुत अधिक शक्ति (50kW से 350kW तक) की आपूर्ति कर सकता है, जिससे 15-45 मिनट में ही बैटरी 80% तक चार्ज हो जाती है। हालाँकि, यह उच्च शक्ति बैटरी में अधिक गर्मी पैदा करती है और उसे तनाव देती है, जिससे लंबे समय में क्षरण तेज हो सकता है।

अपनी बैटरी के लिए अच्छी आदतें (Good Habits for your battery) :
- 80/20 का नियम: अधिकांश विशेषज्ञ दैनिक उपयोग के लिए अपनी बैटरी को 20% से 80% के बीच चार्ज करने की सलाह देते हैं। 100% तक लगातार चार्ज करना या 0% तक डिस्चार्ज होने देना बैटरी सेल्स पर दबाव डालता है।
- तेज चार्जिंग का विवेकपूर्ण उपयोग: DC फास्ट चार्जिंग का उपयोग सिर्फ लंबी यात्राओं के लिए करें, रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नहीं।
- पूर्ण चार्ज केवल यात्रा के लिए: यदि आपको लंबी यात्रा करनी है, तो 100% तक चार्ज करना ठीक है। बस इसे रोजाना न करें।
बैटरी डिग्रेडेशन: कारण, प्रभाव और इसे धीमा करने के उपाय (Battery Degradation: reason,effect and solutions to make it slow)
सभी रासायनिक बैटरियाँ समय और उपयोग के साथ अपनी अ mostम क्षमता खो देती हैं; इसे डिग्रेडेशन कहा जाता है। यह एक प्राकृतिक और सामान्य प्रक्रिया है, इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। आधुनिक ईवी बैटरियाँ आमतौर पर प्रति वर्ष लगभग 1-2% की दर से क्षमता खोती हैं। इसका मतलब है कि 8-10 वर्षों के बाद, आपकी बैटरी की अ mostम क्षमता का लगभग 80-90% शेष रह सकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि क्षरण रैखिक नहीं है; यह पहले कुछ वर्षों में थोड़ा तेज होता है और फिर धीमा हो जाता है।

डिग्रेडेशन के मुख्य कारण (main reasons for degradation of battery):
- चार्ज साइकल की संख्या: हर बार जब आप बैटरी को चार्ज और डिस्चार्ज करते हैं, तो सेल्स内部 थोड़ा खराब होते हैं।
- उच्च तापमान: अत्यधिक गर्मी बैटरी के लिए सबसे बड़ा दुश्मन है। लंबे समय तक उच्च तापमान के संपर्क में रहने से रासायनिक प्रतिक्रियाएँ तेज हो जाती हैं और क्षरण तेजी से होता है।
- उच्च वोल्टेज पर रखना: बैटरी को लंबे समय तक 100% चार्ज पर रखने से सेल्स में तनाव पैदा होता है।
- तेज चार्जिंग (DCFC): जैसा कि ऊपर बताया गया है, उच्च-शक्ति वाली तेज चार्जिंग से गर्मी पैदा होती है, जो क्षरण को गति दे सकती है।
डिग्रेडेशन को धीमा करने के उपाय (technics to slow the degradation of battery):
- चार्जिंग सीमा सेट करें: अपने वाहन की सेटिंग्स में चार्जिंग सीमा 80% पर सेट करें। यात्रा करते समय ही इसे 100% तक बढ़ाएँ।
- तेज चार्जिंग पर निर्भरता कम करें: दैनिक आवश्यकताओं के लिए घर पर AC चार्जिंग का उपयोग करें।
- अत्यधिक तापमान से बचाव: जहाँ संभव हो, गर्म धूप में पार्क करने के बजाय छाया या गेराज में पार्क करें। यदि आपके वाहन में पूर्व-कंडीशनिंग (Pre-conditioning) है, तो चार्जिंग केablue during that time to cool down or heat up the cabin and battery while still plugged in, rather than using the battery’s power for it.
- लंबे समय तक भंडारण: यदि आप अपने ईवी को लंबे समय के लिए छोड़ रहे हैं, तो इसे लगभग 50% चार्ज के साथ Store करें।
आपकी ईवी बैटरी वारंटी: क्या देखें और क्या समझें (Your ev battery’s warranty: what to see and understand):

बैटरी की लागत को देखते हुए, निर्माता ग्राहकों के विश्वास को बढ़ाने के लिए लंबी वारंटी प्रदान करते हैं। अधिकांश ईवी बैटरी वारंटी 8 वर्ष या 1,60,000 किमी (भारत में अक्सर 1,60,000 किमी) तक की होती है, जो भी पहले आए।
हालाँकि, सबसे महत्वपूर्ण विवरण क्षमता प्रतिधारण थ्रेशोल्ड (Capacity Retention Threshold) है। वारंटी आमतौर पर यह गारंटी देती है कि वारंटी अवधि के दौरान बैटरी अपनी मूल क्षमता का कम से कम 70% बनाए रखेगी। यदि यह उससे नीचे चली जाती है (और क्षरण सामान्य उपयोग के कारण हुआ है, दुर्घटना या दुरुपयोग के कारण नहीं), तो निर्माता मरम्मत करेगा या (अक्सर) एक पुनर्निर्मित (refurbished) यूनिट के साथ बदल देगा।
वारंटी खरीदते समय इन बातों पर ध्यान दें (Always care while purchasing the warranty):
- कवरेज थ्रेशोल्ड: क्या यह 70% है या कोई अन्य संख्या?
- स्थानांतरण योग्यता: क्या वारंटी अगले मालिक को Transfer होगी यदि आप कार बेचते हैं? इससे रीसेल वैल्यू बढ़ती है।
- बदलने की शर्तें: क्या पूरे पैक को बदला जाएगा, या सिर्फ़ खराब मॉड्यूल को? पूरा पैक बदलना बेहतर है।
पुरानी ईवी बैटरी का दूसरा जीवन और रीसाइक्लिंग(Second life of old ev battery and recycling):
जब एक ईवी बैटरी एक वाहन के लिए अपनी 70-80% क्षमता खो देती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह बेकार हो गई है। इसके लिए एक पूरा ecosystem विकसित हो रहा है।
- दूसरा जीवन (Second Life): एक ईवी में “अंत” होने के बाद, बैटरी अभी भी ऊर्जा भंडारण के लिए कई वर्षों तक काम कर सकती है। इन्हें सोलर पावर स्टोरेज, बैकअप पावर for buildings, या street lights को बिजली देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह बैटरी के जीवनचक्र के मूल्य को बढ़ाता है और अपशिष्ट को कम करता है।
- रीसाइक्लिंग: अंततः, जब बैटरी वास्तव में अपना जीवनचक्र पूरा कर लेती है, तो इसे रीसायकल किया जा सकता है। लिथियम, कोबाल्ट, निकल और अन्य मूल्यवान धातुओं को निकाला जा सकता है और नई बैटरी बनाने के लिए फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है। रीसाइक्लिंग प्रक्रियाएँ लगातार अधिक कुशल और लागत-प्रभावी होती जा रही हैं, जो नई बैटरी बनाने की पर्यावरणीय लागत और खनन पर निर्भरता को कम करती हैं।

ईवी बैटरी का भविष्य: सॉलिड-स्टेट और उससे आगे(Future of EV batteries: Solid State and ahead):
बैटरी प्रौद्योगिकी का विकास जारी है। अगला बड़ा कदम सॉलिड-स्टेट बैटरी (Solid-State Battery) का होने की उम्मीद है।
- यह कैसे काम करती है: यह पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरी में इस्तेमाल होने वाले तरल या जेल इलेक्ट्रोलाइट को एक ठोस, सेरामिक-आधारित इलेक्ट्रोलाइट से बदल देती है।
- संभावित लाभ:
- अधिक ऊर्जा घनत्व: मौजूदा ईवी की रेंज को दोगुना करने की क्षमता रखती हैं।
- तेज चार्जिंग: चार्जिंग का समय काफी कम हो सकता है (मिनटों में)।
- बेहतर सुरक्षा: कोई ज्वलनशील तरल इलेक्ट्रोलाइट नहीं होने के कारण आग लगने का खतरा बहुत कम हो जाता है।
- लंबा जीवनकाल।
टोयोटा, QuantumScape, और Solid Power जैसी कंपनियाँ इस तकनीक पर काम कर रही हैं, जिसके इस दशक के अंत तक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके अलावा, सोडियम-आयन (Sodium-Ion) जैसी नई और सस्ती रसायन विज्ञान भी विकास के अग्रिम मोर्चे पर हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions):
ईवी बैटरी की लागत कितनी है?
बैटरी पैक की लागत वाहन की कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा है। एक नए पैक की कीमत आमतौर पर ₹5 लाख से ₹15 लाख या उससे भी अधिक हो सकती है। हालाँकि, लंबी वारंटी और बेहतर होती दीर्घायु के कारण, वारंटी के बाहर बैटरी बदलने की आवश्यकता बहुत कम होती है। प्रौद्योगिकी में सुधार और पैमाने के कारण कीमतें लगातार गिर रही हैं।
क्या ईवी बैटरी सुरक्षित हैं? क्या वे आग पकड़ सकती हैं?
हाँ, वे सुरक्षित हैं। उन्हें बाजार में आने से पहले कड़ी सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है और वे सुरक्षात्मक आवरण और BMS जैसी परिष्कृत प्रणालियों से सुरक्षित रहती हैं। हालाँकि, दुर्लभ मामलों में गंभीर दुर्घटनाओं में आग लग सकती है (जैसा कि पेट्रोल/डीजल कारों में भी होता है), लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ईवी की तुलना में आंतरिक दहन इंजन वाले वाहनों में आग लगने की घटनाएँ अधिक हैं।
भारत जैसे गर्म देश में ईवी बैटरी कैसे Perform करती है?
भारत की गर्मी एक चुनौती हो सकती है। इसीलिए एक robust Thermal Management System (TMS) वाली ईवी चुनना महत्वपूर्ण है। तरल शीतलन प्रणाली वाली कारें गर्म मौसम में बेहतर Performance बनाए रखती हैं और तेज चार्जिंग को better handle करती हैं। LFP बैटरी, अपनी बेहतर thermal stability के कारण, भारत जैसे माहौल के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं।
क्या मैं अपनी ईवी बैटरी को Upgrade कर सकता हूँ?
आमतौर पर, नहीं। बैटरी पैक वाहन के चेसिस और overall design का एक integral हिस्सा है। इसे Upgrade करना तकनीकी रूप से बेहद complex और महंगा होगा, और यह वाहन की वारंटी को भी समाप्त कर देगा।
ईवी बैटरी का Weight कितना होता है?
यह कार और उसकी रेंज पर निर्भर करता है। एक compact car के बैटरी पैक का वजन लगभग 250-300 kg हो सकता है, जबकि एक लंबी दूरी की luxury sedan का पैक 600 kg से अधिक हो सकता है। यही कारण है कि ईवी अक्सर उनकी आईसीई समकक्षों की तुलना में भारी होती हैं।
हमें आशा है कि इस विस्तृत मार्गदर्शिका ने आपको इलेक्ट्रिक क्रांति को शक्ति प्रदान करने वाली तकनीक की गहरी समझ प्रदान की है। यदि आपके और प्रश्न हैं, तो कृपया नीचे टिप्पणी करने में संकोच न करें!
ईवी बैटरी की लागत कितनी है?
बैटरी पैक की लागत वाहन की कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा है। एक नए पैक की कीमत आमतौर पर ₹5 लाख से ₹15 लाख या उससे भी अधिक हो सकती है। हालाँकि, लंबी वारंटी और बेहतर होती दीर्घायु के कारण, वारंटी के बाहर बैटरी बदलने की आवश्यकता बहुत कम होती है। प्रौद्योगिकी में सुधार और पैमाने के कारण कीमतें लगातार गिर रही हैं।
क्या ईवी बैटरी सुरक्षित हैं? क्या वे आग पकड़ सकती हैं?
हाँ, वे सुरक्षित हैं। उन्हें बाजार में आने से पहले कड़ी सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है और वे सुरक्षात्मक आवरण और BMS जैसी परिष्कृत प्रणालियों से सुरक्षित रहती हैं। हालाँकि, दुर्लभ मामलों में गंभीर दुर्घटनाओं में आग लग सकती है (जैसा कि पेट्रोल/डीजल कारों में भी होता है), लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ईवी की तुलना में आंतरिक दहन इंजन वाले वाहनों में आग लगने की घटनाएँ अधिक हैं।
भारत जैसे गर्म देश में ईवी बैटरी कैसे Perform करती है?
भारत की गर्मी एक चुनौती हो सकती है। इसीलिए एक robust Thermal Management System (TMS) वाली ईवी चुनना महत्वपूर्ण है। तरल शीतलन प्रणाली वाली कारें गर्म मौसम में बेहतर Performance बनाए रखती हैं और तेज चार्जिंग को better handle करती हैं। LFP बैटरी, अपनी बेहतर thermal stability के कारण, भारत जैसे माहौल के लिए विशेष रूप से उपयुक्त हैं।
क्या मैं अपनी ईवी बैटरी को Upgrade कर सकता हूँ?
आमतौर पर, नहीं। बैटरी पैक वाहन के चेसिस और overall design का एक integral हिस्सा है। इसे Upgrade करना तकनीकी रूप से बेहद complex और महंगा होगा, और यह वाहन की वारंटी को भी समाप्त कर देगा।
ईवी बैटरी का Weight कितना होता है?
यह कार और उसकी रेंज पर निर्भर करता है। एक compact car के बैटरी पैक का वजन लगभग 250-300 kg हो सकता है, जबकि एक लंबी दूरी की luxury sedan का पैक 600 kg से अधिक हो सकता है। यही कारण है कि ईवी अक्सर उनकी आईसीई समकक्षों की तुलना में भारी होती हैं।
Hi