नई बैटरी एनोड और कैथोड सामग्री: भारत की EV बैटरी क्रांति का भविष्य

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परिचय(Introduction)

आज भारत और पूरी दुनिया एक ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) के दौर से गुजर रही है। पेट्रोल और डीज़ल वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण अब असहनीय होता जा रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) सबसे बड़ा समाधान बनकर सामने आए हैं।लेकिन EV उद्योग का असली आधार है – बैटरी।अब तक दुनिया की ज़्यादातर EVs में लिथियम-आयन बैटरियाँ लगी हैं। लेकिन इनकी सीमाएँ (सीमित रेंज, लागत, चार्जिंग समय, सुरक्षा समस्याएँ) धीरे-धीरे साफ दिखने लगी हैं। इसी वजह से वैज्ञानिक और कंपनियाँ नई बैटरी सामग्री पर काम कर रही हैं, जिन्हें हम कहते हैं –

नई बैटरी एनोड और कैथोड सामग्री

जैसे कि – Silicon-Carbon,

Sodium-Ion और

Lithium-Metal.

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भारत और दुनिया में बैटरी की ज़रूरतें: आँकड़े

  • 2023 में दुनिया का EV बैटरी मार्केट लगभग 56 बिलियन डॉलर का था (Bloomberg NEF)।
  • 2030 तक यह मार्केट 400 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा हो सकता है।
  • भारत में EV बिक्री 2022–23 में 155% बढ़कर 11 लाख यूनिट तक पहुँच गई (NITI Aayog)।
  • भारत सरकार ने अनुमान लगाया है कि 2030 तक सड़क पर चलने वाले कुल वाहनों में 30% EV होंगे।
  • इसके लिए भारत को हर साल 600 GWh से ज्यादा बैटरी क्षमता की ज़रूरत पड़ेगी।
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इसका मतलब है कि सिर्फ Lithium-Ion बैटरियों पर निर्भर रहना संभव नहीं है।

यहीं पर नई एनोड और कैथोड सामग्री की भूमिका सामने आती है।

Silicon-Carbon एनोड: ऊर्जा क्षमता का नया अध्याय

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पारंपरिक ग्रेफाइट एनोड की सीमाएँ

  • वर्तमान बैटरियों में ग्रेफाइट एनोड का इस्तेमाल होता है।
  • ग्रेफाइट की ऊर्जा घनत्व (Energy Density) सीमित है – लगभग 372 mAh/g।
  • इसलिए बैटरी का आकार और रेंज सीमित हो जाती है।

Silicon-Carbon Composite (SiCx) की ताकत

  • सिलिकॉन की क्षमता ग्रेफाइट से 10 गुना अधिक है – लगभग 3600 mAh/g।
  • लेकिन सिलिकॉन में चार्जिंग के दौरान फूलने-सिकुड़ने की समस्या (volume expansion up to 300%) होती है।
  • इसका समाधान है → सिलिकॉन-कार्बन कंपोज़िट एनोड (SiCx)।

भारत में Himadri Chem + Sicona की पहल

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  • 2023 में Himadri Speciality Chemical Ltd (भारत) और Sicona Battery Technologies (ऑस्ट्रेलिया) ने साझेदारी की।
  • दोनों मिलकर SiCx एनोड सामग्री भारत में बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं।
  • इसका उपयोग EVs और Grid-Scale Energy Storage दोनों में होगा।

इससे भारत की EV बैटरियाँ 20–30% ज्यादा रेंज, फास्ट चार्जिंग और लंबा जीवनकाल देंगी।

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Sodium-Ion बैटरियाँ: कम लागत वाली नई उम्मीद

सोडियम-आयन क्यों?

  • Lithium दुर्लभ और महँगा है। 2023 में Lithium की कीमतें $70,000/टन तक पहुँचीं।
  • Sodium सस्ता और हर जगह उपलब्ध है – समुद्र के पानी में भी।
  • इसलिए Sodium-Ion बैटरियाँ ज्यादा किफायती हो सकती हैं।

Sodium-Ion बैटरियों के फायदे

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  • कम लागत → Lithium से सस्ता → EVs की कीमत घटेगी।
  • बेहतर तापमान प्रदर्शन → -20°C से लेकर +60°C तक आसानी से काम करती है।
  • सप्लाई चेन स्थिर → Sodium abundance → भारत जैसे देशों को फायदा।
  • Fire Hazard कम → सुरक्षित और स्थिर प्रदर्शन।

Sodium-Ion का भारत में भविष्य

  • चीन की CATL और Faradion (जिसे Reliance ने खरीदा है) Sodium-Ion पर काम कर रही हैं।
  • भारत में Reliance Industries अगले कुछ सालों में Sodium-Ion बैटरी प्रोडक्शन शुरू करने की योजना बना रहा है।
  • 2027–28 तक छोटे EVs (E-Scooters, 3-Wheelers) और Energy Storage में Sodium-Ion बैटरियों का इस्तेमाल आम हो सकता है।

Lithium-Metal बैटरियाँ: EV रेंज में क्रांति

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Lithium-Metal बैटरी की ताकत

  • Lithium Metal एनोड → बहुत ज्यादा Energy Density (~500 Wh/kg तक)।
  • EVs को 600–800 km तक रेंज मिल सकती है।
  • चार्जिंग समय 20–30 मिनट से भी कम हो सकता है।

चुनौतियाँ

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  • Dendrite Formation → Safety issue।
  • Mass Production महँगा।
  • Solid Electrolyte Technology अभी विकसित हो रही है।

Global Development

  • अमेरिका की QuantumScape और Solid Power जैसी कंपनियाँ इस तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं।
  • भारत में Vikram Solar और ISRO के शोधकर्ता इस पर शुरुआती स्टेज पर हैं।
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भारत में नई बैटरी एनोड और कैथोड सामग्री की ज़रूरत

  • Lithium Import Dependence → भारत 70% Lithium-China से आयात करता है।
  • किफायती EV की ज़रूरत → EV adoption तभी बढ़ेगा जब कीमतें घटेंगी।
  • Renewable Energy Storage → 2030 तक भारत में 500 GW Renewable Energy का लक्ष्य है, जिसके लिए नई बैटरियाँ चाहिए।
  • Local Manufacturing और रोजगार → नई बैटरी सामग्री से Battery GigaFactories और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

भारत में प्रमुख खिलाड़ी और तकनीक (major players and technology)

  • Himadri + Sicona → Silicon-Carbon एनोड
  • Reliance + Faradion → Sodium-Ion बैटरियाँ
  • Exide + Leclanché JV → Advanced Lithium Batteries
  • Ola Electric → Battery Innovation Hub
  • Vikram Solar → Solid-State / Lithium-Metal Research

इन सभी प्रयासों से भारत 2030 तक बैटरी मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है।

पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी पहलू ( environment and Sustainability prospects)

  • नई एनोड/कैथोड सामग्रियाँ ज्यादा रीसाइक्लेबल हैं।
  • Sodium-ion बैटरी का environmental impact Lithium से कम है।
  • Silicon-Carbon एनोड बैटरियाँ ज्यादा टिकाऊ और सुरक्षित हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत और दुनिया एक बैटरी क्रांति के मुहाने पर खड़े हैं।नई बैटरी एनोड और कैथोड सामग्री जैसे Silicon-Carbon, Sodium-Ion और Lithium-Metal आने वाले 10 वर्षों में EVs और Energy Storage को पूरी तरह बदल देंगी।

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भारत के लिए यह अवसर है कि वह केवल उपभोक्ता न रहे, बल्कि बैटरी तकनीक का वैश्विक निर्माता और निर्यातक भी बने।

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