प्रस्तावना (Introduction)
भारत इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की दुनिया में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। सरकार की नीतियाँ, बढ़ते पेट्रोल-डीज़ल के दाम और पर्यावरण की चिंता—ये सब कारण हैं कि लोग EV अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन EV क्रांति के साथ एक बड़ा सवाल सामने खड़ा है: जब बैटरियाँ अपनी लाइफ पूरी कर लेंगी, तब उनका क्या होगा?एक इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी औसतन 7 से 10 साल तक काम करती है। उसके बाद वह “End-of-Life” कैटेगरी में आ जाती है। यही वह स्टेज है, जब बैटरी को या तो Battery Recycling से फिर से उपयोगी बनाना होगा, या उसे सुरक्षित तरीके से डिस्पोज़ करना होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह ई-वेस्ट (E-waste) की सबसे बड़ी समस्या बन सकती है।

बैटरी रीसाइक्लिंग क्यों है ज़रूरी?
1. पर्यावरण की सुरक्षा
लिथियम-आयन बैटरियों में Cobalt, Nickel, Lithium, Manganese जैसी धातुएँ और जहरीले केमिकल्स पाए जाते हैं। अगर इन्हें कचरे में फेंक दिया जाए तो यह मिट्टी और भूजल को प्रदूषित कर सकते हैं। रिसर्च बताती है कि सिर्फ एक EV बैटरी अगर सही तरह से डिस्पोज़ न हो तो वह हज़ारों लीटर पानी को ज़हरीला बना सकती है।
2. प्राकृतिक संसाधनों की बचत

Lithium और Cobalt जैसी धातुएँ सीमित मात्रा में पृथ्वी पर उपलब्ध हैं। इनका खनन महंगा भी है और पर्यावरण को नुकसान भी पहुँचाता है। Battery Recycling से हम इन धातुओं को दोबारा निकालकर नई बैटरियाँ बना सकते हैं।
3. आयात पर निर्भरता कम करना
भारत बैटरियों के कच्चे माल के लिए ज़्यादातर चीन और अफ्रीका जैसे देशों पर निर्भर है। अगर हम अपनी बैटरियों को रीसायकल करेंगे तो Import की ज़रूरत घटेगी और “Atmanirbhar Bharat” का सपना मजबूत होगा।👉

भारत में बैटरी रीसाइक्लिंग की मौजूदा स्थिति
भारत अभी शुरुआती दौर में है। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण पहलें हुई हैं:
1. Battery Waste Management Rules
सरकार ने यह नियम लागू किए हैं ताकि कंपनियाँ अपनी बैटरियों की ज़िम्मेदारी लें।
इसमें “Extended Producer Responsibility (EPR)” लागू है, जिसके तहत निर्माता कंपनियों को पुरानी बैटरियाँ वापस लेकर रीसायकल करनी होंगी।
2. स्टार्टअप्स की भूमिका
Attero Recycling:
भारत की सबसे बड़ी लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग कंपनी है जोकी लिथियम आयन बैटरी रीसायकल करती है।
Lohum Cleantech:
Lohum Cleantech सेकेंड-लाइफ बैटरियों पर काम कर रही है।अन्य कई स्टार्टअप्स इस सेक्टर में इनोवेशन ला रहे हैं।
3. सरकारी योजनाएँ और निवेश
सरकार ने 18,000 करोड़ रुपये की PLI (Production Linked Incentive) स्कीम शुरू की है, जिससे बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा।

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EV बैटरी रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया
1. कलेक्शन और सॉर्टिंग
पुरानी बैटरियों को EV डीलर्स, सर्विस सेंटर और ग्राहकों से इकट्ठा किया जाता है। यहाँ यह तय किया जाता है कि कौन सी बैटरी पूरी तरह खराब है और कौन सी “सेकेंड-लाइफ” के लिए इस्तेमाल हो सकती है।
2. डिस्मैंटलिंग
बैटरी पैक को खोला जाता है। हर पैक में कई छोटे-छोटे सेल होते हैं। इन्हें अलग-अलग करके आगे भेजा जाता है।

3. प्रोसेसिंग
हाइड्रोमेटलर्जी: केमिकल्स की मदद से मेटल्स जैसे Lithium, Nickel, Cobalt को घोलकर निकाला जाता है।
पायरोमेटलर्जी: बैटरियों को उच्च तापमान पर पिघलाकर मेटल्स को अलग किया जाता है।
4. रीयूज़ और सेकेंड-लाइफ
जिन बैटरियों की क्षमता 70-80% बची होती है, उन्हें सीधे Solar Energy Storage या बैकअप सिस्टम में इस्तेमाल किया जाता है। यह Battery Recycling का एक स्मार्ट तरीका है।

बैटरी रीसाइक्लिंग में चुनौतियाँ
टेक्नोलॉजी की कमी: भारत में अभी बड़ी स्केल की रीसाइक्लिंग फैक्ट्रियाँ बहुत कम हैं। विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता है।
हाई कॉस्ट : Lithium और Cobalt रिकवरी की प्रक्रिया महंगी है। छोटे स्तर की कंपनियाँ इसमें निवेश नहीं कर पातीं।
अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर : कई बार बैटरियाँ कबाड़ में चली जाती हैं जहाँ असुरक्षित तरीके से इन्हें जलाया या तोड़ा जाता है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों को खतरा होता है।
अवेयरनेस की कमी : आम जनता को अभी तक पता ही नहीं है कि पुरानी EV बैटरी कहाँ और कैसे जमा करनी चाहिए।
बैटरी रीसाइक्लिंग का भविष्य भारत में

2030 का बड़ा लक्ष्य
रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2030 तक भारत में EV बैटरियों की डिमांड 100 GWh से अधिक हो जाएगी। इसका मतलब है लाखों टन End-of-Life बैटरियाँ।
यहाँ Battery Recycling एक अरबों डॉलर का उद्योग बन सकता है।
स्टार्टअप और निवेश का उभार
देशी-विदेशी कंपनियाँ भारत में बैटरी रीसाइक्लिंग यूनिट लगाने में दिलचस्पी दिखा रही हैं। यह रोज़गार भी बढ़ाएगा और टेक्नोलॉजी को भी आगे ले जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
अगर भारत खुद बैटरियों को रीसायकल करेगा तो Lithium, Nickel और Cobalt की सप्लाई का 50% तक घरेलू स्तर पर पूरा हो सकता है।

आम लोगों के लिए संदेश
- अपनी EV बैटरी को कबाड़ में न बेचें।
- सिर्फ अधिकृत Battery Recycling कंपनियों को ही बैटरी दें।
- EV खरीदते समय कंपनी की बैटरी रीसाइक्लिंग पॉलिसी जरूर पढ़ें।
- जागरूक उपभोक्ता ही इस चेन को मजबूत बना सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
भारत का EV भविष्य तभी सुरक्षित है जब हम बैटरियों के पूरे जीवन-चक्र को सही तरीके से मैनेज करें। Battery Recycling न सिर्फ पर्यावरण बचाने का तरीका है, बल्कि यह भारत को ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर भी ले जाएगा। आने वाले समय में यह सेक्टर भारत की ग्रीन इकॉनमी का महत्वपूर्ण स्तंभ बनने वाला है।
“क्या आपको लगता है कि भारत 2030 तक बैटरी रीसाइक्लिंग में विश्व लीडर बन सकता है? अपने विचार कमेंट में ज़रूर साझा करें।”
